राजनीति की दुनिया में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनका नाम सुनते ही “साफ छवि” और “जनसेवा” की तस्वीर सामने आ जाती है। सी.पी. राधाकृष्णन उन्हीं नेताओं में से एक हैं। तमिलनाडु के तिरुपुर से राजनीति की शुरुआत करने वाले राधाकृष्णन आज एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाए गए हैं। आइए जानते हैं उनका पूरा सफर —
शुरुआती जीवन
जन्म: 20 अक्टूबर 1957, तिरुपुर (तमिलनाडु)
पढ़ाई: बीबीए (V.O. चिदंबरम कॉलेज, तूतीकोरिन)
शुरुआत: 17 साल की उम्र में आरएसएस और जनसंघ से जुड़े।
राजनीतिक करियर
ये 1998 और 1999 में कोयंबटूर से बीजेपी सांसद बने।
उसके बाद भाजपा तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष (2004–2007) रहे। कई बार पदयात्रा और रथयात्रा निकालकर जनता से सीधा जुड़ाव बनाया। टेक्सटाइल बिज़नेस से जुड़े और देश-विदेश में उद्योग जगत को बढ़ावा दिया। 2016–2020 तक कोयर बोर्ड चेयरमैन रहे। उसके बाद से 2020–22 तक बीजेपी केरल प्रभारी भी रहे।
राज्यपाल पदों की जिम्मेदारी
सबसे पहले ये 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने। बाद में तेलंगाना व पुदुच्चेरी के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार संभाला। उसके बाद जुलाई 2024 से महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे।
उपराष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी
17 अगस्त 2025 को एनडीए ने सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया। उनकी सबसे बड़ी ताकत है – साफ छवि, सभी दलों से अच्छे संबंध और जनता से गहरा जुड़ाव। दक्षिण भारत खासकर तमिलनाडु में बीजेपी की पकड़ मजबूत करने के लिए भी यह रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
कब है चुनाव?
उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर 2025 को होगा। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि विपक्ष कौन-सा उम्मीदवार मैदान में उतारता है।
निष्कर्ष
सी.पी. राधाकृष्णन का जीवन हमें यह सिखाता है कि ईमानदारी और लगातार मेहनत से राजनीति में भी साफ-सुथरी छवि बनाई जा सकती है। अगर वे उपराष्ट्रपति बनते हैं, तो यह न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव की बात होगी।
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