2025 में RBI ने कर दिया बड़ा ऐलान! EMI भरने वालों के लिए खुशखबरी या टेंशन?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 से 6 अगस्त 2025 को आयोजित हुई थी। इसमें देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई, और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। आज हम जानेंगे कि RBI ने क्या फैसला लिया, इसका आपकी जेब और भविष्य की योजनाओं पर क्या असर पड़ेगा।

प्रमुख निर्णय (Monetary Policy Highlights)

1. रेपो रेट को 5.50% पर स्थिर रखा गया

RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। मार्च और मई 2025 में कुल मिलाकर 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी, लेकिन अब बैंक ने इसे 5.50% पर बरकरार रखा है।

🔹 रेपो रेट वही दर होती है जिस पर RBI अन्य बैंकों को कर्ज देता है।
🔹 रेपो रेट घटे तो लोन सस्ते होते हैं, बढ़े तो महंगे।

2. नीतिगत रुख (Policy Stance): “न्यूट्रल” रखा गया

RBI ने ‘एडजस्टमेंट’ या ‘एकॉमोडेटिव’ रुख की जगह अब “न्यूट्रल” रुख अपनाया है। इसका मतलब है कि RBI आगे की नीतियों में लचीलापन रखेगा — जरूरत पड़ी तो बढ़ाएगा या घटाएगा।

विकास और मुद्रास्फीति (GDP और महंगाई) पर अनुमान

सूचकांक अनुमान

GDP वृद्धि दर (FY26) 6.5%
खुदरा महंगाई (CPI) 3.1%

जून 2025 में खुदरा महंगाई दर सिर्फ 2.1% रही, जो पिछले 6 वर्षों की सबसे निचली दर है। कोर महंगाई (core inflation) धीरे-धीरे बढ़कर FY27 की दूसरी तिमाही में 4.9% तक पहुंच सकती है।

अन्य प्रमुख दरें

रेपो रेट (Repo Rate) — 5.50%
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) — 5.25%
मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) — 5.75%
बैंक रेट — 5.75%
कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) — 3%

वैश्विक और घरेलू कारण

RBI के इस निर्णय के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

1. वैश्विक अनिश्चितताएं – अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए नए टैरिफ (25%) ने निर्यात और व्यापार असंतुलन की चिंता बढ़ा दी है।
2. तेल की कीमतों और डॉलर में उतार-चढ़ाव – तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ सकती है।
3. पहले की कटौतियों का असर देखने की जरूरत – RBI का मानना है कि मार्च और मई में की गई कटौतियों का असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है।

आम जनता के लिए क्या मतलब है?

• होम लोन और कार लोन लेने वालों के लिए
• ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रहेंगी।
* जिन बैंकों ने पहले ही दरें घटा दी हैं, उनसे लोन लेना लाभदायक हो सकता है।

बचत करने वालों के लिए

* फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरें बहुत ज़्यादा नहीं बढ़ेंगी।
* सीनियर सिटीज़न स्कीम्स जैसे विकल्प ज़्यादा फायदेमंद हो सकते हैं।

निवेशकों और व्यापारियों के लिए

* बाजार में स्थिरता रहेगी, लेकिन वैश्विक घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है।
* विदेशी निवेश प्रवाह में कमी आने की आशंका बनी हुई है।

आगे क्या?

RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक अक्टूबर 2025 में होगी। तब तक कई आर्थिक संकेतक जैसे महंगाई, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन, और मानसून पर भी नजर रखनी होगी।

निष्कर्ष

RBI ने इस बार बहुत संतुलित रुख अपनाया है — न तो कोई बड़ा बदलाव किया और न ही कोई स्पष्ट संकेत दिया कि अगला कदम क्या होगा। इसका मतलब है कि बैंक पहले से लिए गए कदमों का असर देखना चाहता है और अगर हालात बिगड़ते नहीं हैं, तो शायद अब आगे लंबे समय तक ब्याज दरों में बदलाव नहीं होगा।

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