भोजपुरी के प्रसिद्ध कलाकार खेसारी लाल यादव ने इस बार छपरा विधानसभा सीट से राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में कदम रखा। हालांकि, चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे, और उनकी प्रतिद्वंद्वी छोटी कुमारी (भारतीय जनता पार्टी) ने उन्हें लगभग 7,600 वोटों के अंतर से हराया।
छपरा सीट इस चुनाव में काफी चर्चित रही, खासकर खेसारी जैसे मशहूर चेहरे के राजनीति में आने के कारण। शुरुआत में माहौल उनके अनुकूल लग रहा था, लेकिन मतगणना के दौरान, छोटी कुमारी की बढ़त लगातार बनी रही। अंत में, छोटी कुमारी को लगभग 86,845 वोट मिले, जबकि खेसारी को करीब 79,245 वोट हासिल हुए।
छोटी कुमारी की बड़ी जीत
पराजय स्वीकार करते हुए खेसारी ने कहा कि उन्होंने जनता का आभार व्यक्त किया है और हमेशा उनके बीच रहने का वादा किया है। दूसरी ओर, छोटी कुमारी ने अपनी जीत के बारे में कहा कि यह “मेरी नहीं, बल्कि छपरा की जनता की जीत” है, और उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय जनता के विश्वास को दिया।
इस हार से मिलने वाले मुख्य सबक हैं-
* स्टारडम और लोकप्रियता निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण पहलू हैं, लेकिन स्थानीय समीकरण, पार्टी की मजबूती और सक्रिय प्रचार-प्रसार भी उतना ही महत्त्वपूर्ण हैं।
* छपरा सीट पर बीजेपी की जमीनी स्थिति पिछले चुनावों के मुकाबले और भी मजबूत हो गई है, जिससे राजद-खेसारी के लिए स्थिति सरल नहीं रही।
* हार के बाद खेसारी का दृष्टिकोण सकारात्मक रहा, जिसने उनकी छवि को कुछ हद तक सुरक्षित रखने में मदद की।
निष्कर्ष
आखिरकार, भले ही खेसारी लाल यादव इस चुनाव में विजयी नहीं हो सके, उन्होंने छपरा की राजनीति में अपनी पहचान बनाई है। यह हार उनके लिए नए प्रयोग की शुरुआत हो सकती है, और आगे का मार्ग अभी बाकी है।

